क्रिकेट कार्निवाल में शाहरूख खान के कोलकाता नाइट राइडर्स टीम में अन्तत: रवीन्द्रनाथ और महाबली खली। नीली क्रान्ति के विपणन में बेशर्म सांस्कृतिक संक्रमण का अद्भुत तामाशा। तमाशबीन पश्चिम बंगीय पोंगापंथी मार्क्सवादी पूंजीवादी सवर्ण बांग्ला राष्ट्रीयता।
क्रिकेट कार्निवाल में शाहरूख खान के कोलकाता नाइट राइडर्स टीम में अन्तत: रवीन्द्रनाथ और महाबली खली। नीली क्रान्ति के विपणन में बेशर्म सांस्कृतिक संक्रमण का अद्भुत तामाशा। तमाशबीन पश्चिम बंगीय पोंगापंथी मार्क्सवादी पूंजीवादी सवर्ण बांग्ला राष्ट्रीयता।
पलाश विश्वास
अपने जाने-माने अंदाज में कोलकातावासियों का अपनापन और प्यार पाने के लिए सुपरस्टार व आईपीएल कोलकाता टीम के मालिक शाहरुख खान ने गुरुवार को खुद को साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर का जबरदस्त प्रशंसक बताया। ईडन गार्डन में मैच के लिए शाम को शहर के हवाई अड्डे पर उतरते ही शाहरुख ने कहा, “मैं रवीन्द्र नाथ टैगोर का जबरदस्त प्रशंसक हूं। मुझे बंगाली नहीं आती लेकिन मैंने उनकी सभी अनुवादित कविताएं पढ़ी हैं।
रवीन्द्रनाथ का भूमंडलीय बाजार में कारपोरेट इस्तेमाल कोई नयी बात नहीं है। रवीन्द्र नोबेल पदक और रवीन्द्र विरासत गंवाने वाले कविगुरु के सपनों की तपस्याभूमि विश्वभारती इस आपाधापी में सबसे आगे है। पोंगापंथियों ने वोटबैंक समीकरण और मूलनिवासी सफाया एजंडा के तहत अंधाधुंध शहरीकरण और पूंजीवादी विकास में रवीन्द्र का भरपूर इस्तेमाल किया। पाक फौजी हुकूमत ने भारतीय राष्ट्रीयता के जनक और विश्व बन्धुत्व के प्रवक्ता जिस कवि पर प्रतिबन्ध लगाकर बांग्ला भाषा आन्दोलन और बांग्लादेश मुक्तिसंग्राम की जमीन तैयार की, जिस कवि के रोमांटिक गीत आमार बांग्ला आमि तोमाय भालोबासि होंठों पर सजाकर तीस लाख आजादी के दीवाने बंगालियों ने, हिन्दुओं और मुसलमानों ले विभाजन और मजहब के नाम पर दो राष्ट्र सिद्धान्त को खारिज करके हंसते हंसते शहादते दी, लाखों मां बहनों ने आजादी की कीमत बतौर अपनी अस्मत तक दांव पर लगा दिया, हमलावरो के सामूहिक बलात्कार और उनके नाजायज गर्भ को झेल लिया, उस रवीन्द्रनाथ का इस्तेमाल मूलनिवासी सफाया अभियान में हो रहा है। बेशर्म बुद्ध बुश प्रणव तिकड़ी ने साम्राज्यवादी, सामन्ती पूंजीवादी मनुस्मृति व्यवस्थ और रंगभेदी श्वेत नवउदारवादी सार्वभौम बाजार में खड़ा कर दिया रवीन्द्रनाथ को। जलेस प्रलेस ने प्रेमचंद को पूंजीवादी विकास का पक्षधर साबित किया तो उन्ही की पोंगापंथी पश्चिम पंग सरकार ने रवीन्द्र जयंती पर सरकारी विज्ञापन जारी करते हुए रवीन्द्रनाथ को शहरीकरण. औद्यौगीकरण, सेज, कैमिकल हब और परमाणु ऊर्जी का प्रवक्ता बना दिया है। तो शाहरूख खान ने अप्रवासी कारपोरेट सवर्ण सत्तावर्ग के अंधाधुंध मुनाफे के लिए रवीन्द्रनाथ को भुनाया तो क्या गुनाह किया?
खासकर तब जबकि लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी की अगुवाई में शान्तिनिकेतन अब प्रोमोटरों बिल्दरों माफिया के हवाले है? आनन्दबाजार प्रकाशन सूह ने रवीन्द्र को नीली क्रानित में समाहित करने की मुहिम छेड़कर बांग्ला भाष का बतौर वेश्यावृत्ति इस्तेमाल जारी रखा है अपने गुलाम संस्कृतिकर्मियों के जरिए। जिनमें कोई साहित्य अकादमी अध्यक्ष है तो कोई प्रतिरोध आन्दोलन का मसीहा। इस कार्रवाई को सत्ता और सत्तावर्ग का पूरा समर्थन है तो शाहरुख की आलोचना किस आधार पर?
रवीन्द्र के दलित विमर्श पर बंगाल में चर्ची नहीं होती। हालांकि अस्पृश्.ता के विरुद्ध और बौद्धधर्म के पक्ष में लिख नृत्य नाटिका चंडालिनी का मंचन सबसे ज्याद होता है। नोबेल पुरस्कार पाने से पहले तक अस्पृश्य थे रवीन्द्रनाथ और उन्हे पुरी के मन्दिर में प्रवे नहीं करने दिया गया। गीतांजलि अन्त्यज सूफी संत दर्शन बाउल संस्कृति से प्रेरित है और अछूतों के पक्ष में रवीन्द्रनाथ ने राशियार चिठि जैसी रचनाएं तक लिखीं। रथेर रशि में उन्होंन बाकायदा अस्पृश्य मूलनिवासियों के नेतृत्व में परिवर्तन की बात की। पर नोबेल पदकधारी मूलनिवासियों के सबसे महान कवि पर सवर्ण सत्तावर्ग ने ऐसा कब्जा जमाया कि उनके दलित विमर्श पर चर्चा ही शुरु नहीं हुई। हिन्दी में भी ऐसे सवर्ण मसीहा मौजूद हैं जो साहि्य विरासत का इस्तेमाल सवर्म हित में करते हैं और साहित्य अकादमी, सरकार, हिंदी प्रसार से लेकर जसम जलेस तक में अग्रगामी हैं। ऐसे ही एक महान मसीहा कवि केदार नाथ सिंह और उनके पिट्ठू प्रकाशक हरिश्चन्द्र पांडे मेरी पुस्तक रवींन्द्र का दलित विमर्श की पांडुलिपि वर्षों से दबाये हुए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन को राहत देते हुए उनके खिलाफ हिंदू देवियों के अश्लील पेंटिंग्स बनाकर धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने के आरोप में दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया है। जस्टिस संजय किशन कौल ने मामले को आधारहीन बताते हुए कहा कि यह भिन्न अभिमत का मामला है, जो आपराधिक मामले का आधार नहीं बन सकता है।
वर्ष 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस के लेखक और कार्यकर्ता डोमिनिक लैपियर ने कहा है कि यहां के प्रभावित इलाकों में बच्चे जहरीला पानी पी रहे हैं। राजधानी के जंतर-मंतर में रविवार शाम को भोपाल गैस त्रासदी के प्रभावितों के प्रदर्शन के दौरान लैपियर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गुजारिश की कि इनकी समस्याओं को सुनें।
ईडन गार्डन में मैच के लिए शाम को शहर के हवाई अड्डे पर उतरते ही शाहरुख ने कहा, “मैं रवीन्द्र नाथ टैगोर का जबरदस्त प्रशंसक हूं। मुझे बंगाली नहीं आती लेकिन मैंने उनकी सभी अनुवादित कविताएं पढ़ी हैं।”
बांग्ला के सुप्रसिद्ध साहित्यकार गुरुदेव टैगोर की प्रशंसा करते हुए शाहरुख ने कहा, “टैगोर विश्व साहित्य के सार-संग्रह हैं। मैं जब भी तनाव में होता हूं, उनके गीत व कविताएं मुझे प्रेरित करती हैं।”
शाहरुख ने टाला संगीत कार्यक्रम
गुरुदेव के जन्म दिन के खास मौके पर अपनी टीम का टैगोर की जन्म स्थली “बंगाल” में मैच खेलने को उन्होंने टीम के लिए गौरव का विषय बताया।
आज गुरुदेव की जयंती है और आज के दिन शाहरुख के कार्यक्रम को पश्चिम बंगाल सरकार ने यह कह कर अनुमति नहीं दी थी कि यह उनकी संस्कृति के अनुरूप नहीं।
बाद में कोलकातावासियों की संवेदना को ध्यान में रखते हुए शाहरुख ने खेल से पहले 10 मिनट के अपने कार्यक्रम को रद्द कर दिया।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर (बांग्ला: রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর रोबिन्द्रोनाथ् ठाकुर्) (7 मई, 1861 – 7 अगस्त, 1941) को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है, विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता हैं। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगद्रष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति है। उन्होने भारत के राष्ट्रीय गान जन गण मन और बांग्लादेश के राष्ट्रीय गान आमार सोनार बांग्ला की रचना की।
इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स और बेंगलूर रॉयल चैलेंजर्स के बीच होने वाला मैच बारिश के कारण निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सका है। दोनों ही टीमों का टूर्नामेंट में अब तक का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। कोलकाता ने छह मैचों में 2 में जीत दर्ज की है जबकि चार में उसे हार का सामना करना पड़ा है वहीं बेंगलूर को सात मैचों में दो में जीत व पांच में हार मिली है। कोलकाता के पुलिस कमिश्नर गौतम मोहन चक्रवर्ती ने मंगलवार को कहा कि ईडन गार्डंस में गुरुवार को कोलकाता नाइट राइडर्स और बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स के बीच होने वाले आईपीएल के मैच के पहले फिल्म अभिनेता शाहरुख खान का कार्यक्रम नहीं होगा। उन्होंने कहा रेड चिल्ली इंटरटेनमेंट ने उन्हें बताया कि नाइट राइडर्स टीम के मालिक शाहरुख इस महत्वपूर्ण ट्वेंटी-20 मैच के पहले अपना कार्यक्रम पेश नहीं करेंगे।
महान साहित्यकार तथा नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर का आठ मई को जन्मदिन है। पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री सुभाष चक्रवर्ती ने बंगाल क्रिकेट असोसिएशन (कैब) से कहा है कि वह शाहरुख खान के शो के आयोजकों को स्वर्गीय टैगोर के जन्मदिन की अहमियत के बारे में बताएं।
उन्होंने कहा, ‘उस पावन दिन कोई व्यक्ति ऐसा कार्यक्रम आखिर कैसे कर सकता है जो हमारी संस्कृति और परंपराओं से मेल नहीं खाता।’ गौरतलब है कि बंगाल के लोग हर ‘पचीशे बैशाख’ के दिन कवि गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्मदिन बहुत उत्साह तथा हर्षोल्लास से मनाते हैं। अगर शो का आयोजन बहुत जरूरी है तो कैब को आयोजकों से इस कार्यक्रम के स्थान में बदलाव करने के लिए कहना चाहिए। ‘
चक्रवर्ती का यह बयान ऐसे समय आया है जब शो की मैनेजमेंट कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, पुलिस और कैब शाहरुख इसके लिए ईडन गार्डन्स में सही जगह के बारे में विचार-विमर्श कर रहे हैं।
जीवन
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म सन 1861 में कलकत्ता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ। then बचपन से ही उनका कविता, छन्द और भाषा में अद्भूत प्रतिभा का आभास लोगों को मिलने लगा। देश और विदेश के सारे साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को वे आहरण करके अपने अन्दर सिमट लिए थे। उनके पिता ब्राह्म धर्म के होने के कारण रवीन्द्रनाथ भी ब्राह्म कहलाते थे। पर अपने रचनाओं व कर्म के द्वारा उन्होने सनातन धर्म को भी रहा दी और आगे बढ़ाया।
मनुष्य और ईश्वर के बीच जो चिरस्थायी सम्पर्क है, उनके रचनाओ के अन्दर वे अलग अलग रूपों में उभर आये। साहित्य का शायद ही ऐसा कोइ शाखा है, जिनमें उनकी सृष्टि न हो - कविता, गान, कथा, उपन्यास, नाटक, प्रबन्ध, शिल्पकला - सभी मे।
उनके कविताओं अलग अलग पुस्तकों में प्रकाशित हुई - गीतांजली, गीताली, गीतिमाल्य, कथा ओ कहानी, शिशु, शिशु भोलानाथ, कणिका, क्षणिका, खेया आदि। एक आध पुस्तको फिर उन्होने अंग्रजी में अनुवाद करने लगे। अब तक तो उनके प्रतिभा बंगाली समाज में ही समादृत हुआ था, पर अनुवाद होते ही वह विश्व को भी दिखने लगा।
[संपादित करें] सम्मान
उन्हे साहित्य के लिये 1915 का नोबेल पुरस्कार मिला।
[संपादित करें] रवीन्द्र साहित्य
गीताञ्जलि से एक लोकप्रिय रचनाः


